
पंजाब की सियासत में नई करवट लेने जा रही है। लुधियाना वेस्ट के बाद अब तरनतारन विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। भले ही चुनाव आयोग ने अभी तक आधिकारिक तारीखों का ऐलान नहीं किया हो, लेकिन संभावित अक्टूबर चुनाव को लेकर मतदाता सूची के संक्षिप्त पुनरीक्षण की घोषणा कर दी गई है। इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है क्योंकि अब यह सिर्फ परंपरागत दलों तक सीमित नहीं रहने वाला।
अमृतपाल सिंह की पार्टी ‘वारिस पंजाब दे’ भी मैदान में
तरनतारन का उपचुनाव इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि जेल में बंद कट्टरपंथी नेता अमृतपाल सिंह की पार्टी ‘वारिस पंजाब दे’ इस चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने जा रही है। शुरुआत में अमृतपाल के पिता ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा को उम्मीदवार बनाने की बात कही थी, लेकिन उनके इनकार के बाद अब पार्टी नया चेहरा तलाश रही है।

बेअंत सिंह की बेटी का चुनावी ऐलान
इस चुनाव को और रोचक बनाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या में शामिल बेअंत सिंह की बेटी बीबी अमृतकौर मलोया ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अमृतकौर का बेटा सरबजीत सिंह खालसा पहले ही फरीदकोट लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंच चुका है। खास बात यह है कि सरबजीत और अमृतपाल मिलकर एक नई पार्टी की नींव रख चुके हैं, जो पंजाब की राजनीतिक धारा में नए विचारों के साथ प्रवेश कर रही है।
चारों पारंपरिक दल भी होंगे मुकाबले में
तरनतारन सीट पर मुकाबला सिर्फ नई ताकतों तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा भी अपने-अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में उतरेंगी। लेकिन इस बार उन्हें दो नए चेहरों — अमृतपाल की पार्टी के उम्मीदवार और बीबी अमृतकौर मलोया जैसी भावनात्मक और वैचारिक चुनौती से जूझना पड़ेगा।

बदलती सियासी ज़मीन का संकेत
तरनतारन उपचुनाव न केवल एक सीट का मामला होगा, बल्कि यह पंजाब की सियासी ज़मीन में हो रहे गहरे बदलावों का संकेत भी देगा। मतदाता अब परंपरा से हटकर सोच रहे हैं, और यह उपचुनाव 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की राजनीतिक दिशा का ट्रेलर साबित हो सकता है।
तरनतारन उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं है, यह नए और पुराने राजनीतिक विचारों की टक्कर बनता जा रहा है। पारंपरिक पार्टियों को पहली बार वैचारिक स्तर पर गंभीर चुनौती मिल रही है। जेल में बंद नेता की पार्टी, एक पूर्व प्रधानमंत्री के हत्यारे की बेटी, और चुनावी मंच पर उतरती नई भावनाएं — ये सभी तरनतारन को पंजाब की राजनीति का अगला बड़ा मोर्चा बना रही हैं।
