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निगम घोटाला: भ्रष्टाचारियों पर मेहरबान BJP!

 

हरियाणा में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बातें करने वाली बीजेपी सरकार का असली चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है। फरीदाबाद नगर निगम घोटाले में शामिल चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की जांच की इजाज़त देने से सीएम नायब सिंह सैनी की सरकार ने साफ इनकार कर दिया है।
राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी मांगी थी, लेकिन सरकार ने ढाल बनकर उन्हें बचा लिया। नतीजा यह कि करोड़ों के घोटाले की जांच अब ठप पड़ गई है।


भ्रष्टाचार की कहानियाँ, पर सरकार की चुप्पी

एफआईआर 11 (मार्च 2022): वार्ड 14 में 54 लाख का काम 1.97 करोड़ दिखा दिया गया। आरोपी आईएएस यश गर्ग, लेकिन सरकार ने अनुमति ही नहीं दी।
एफआईआर 13 (अप्रैल 2022): सात वार्डों में 1.26 करोड़ का भुगतान, जबकि ज़मीन पर काम गायब। फिर भी गर्ग पर कार्रवाई रोक दी गई।
एफआईआर 21 (जून 2022): बिना टेंडर दिए ठेकेदार को 1.76 करोड़ का भुगतान। सोनल गोयल और मोहम्मद शायिन को भी सरकार ने बचा लिया।
एफआईआर 23 (जुलाई 2022): दो दिन में टाइलों का खर्च 25 लाख से 2 करोड़ कर दिया गया। चारों अफसरों पर मामला, लेकिन सब पर सरकार ने शिकंजा कसने से मना कर दिया।

एफआईआर 24 (सितंबर 2023): सड़क डिवाइडर की लागत 27 लाख से बढ़ाकर 4.94 करोड़ कर दी गई। इसमें अनीता यादव पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन बाकी अफसरों को सैनी सरकार ने बचा लिया।

बीजेपी सरकार की ‘चुनिंदा ईमानदारी’
साफ दिख रहा है कि जब मामला बड़े अफसरों का हो तो सरकार ढाल बन जाती है। नायब सिंह सैनी की सरकार ने एसीबी को अपंग बना दिया है, क्योंकि पीसी एक्ट की धारा 17A के तहत राज्य की मंजूरी बिना जांच ही नहीं हो सकती। यानी भ्रष्टाचारियों को खुली छूट।
आईएएस अधिकारी अनीता यादव ने भी साफ कहा है कि “मुझे जानबूझकर निशाना बनाया गया है, जबकि बाकी अफसरों पर भी समान आरोप हैं।” उनका यह बयान बता रहा है कि सरकार किस तरह चुनिंदा कार्रवाई करके बाकी भ्रष्ट अफसरों को बचा रही है।


असली सवाल
क्या बीजेपी की सरकार भ्रष्टाचार मिटाने आई थी या उसे बढ़ाने? जनता को यह जवाब चाहिए कि क्यों हरियाणा की सरकार भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही है और जांच एजेंसियों के हाथ बाँध रही है।

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