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भाजपा अध्यक्ष पद पर अनिश्चितता, चुनाव फिर टला, अब बिहार के बाद तय होगा भविष्य?

 

भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से सस्पेंस बना हुआ है। पहले संसद सत्र, फिर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान और अब उप राष्ट्रपति चुनाव की व्यस्तताओं के चलते यह मामला बार-बार टलता गया। अब चर्चा यह है कि नवंबर में संभावित बिहार विधानसभा चुनाव के बाद ही भाजपा अध्यक्ष का चुनाव होगा।

जेपी नड्डा: कार्यकाल लंबा, पर स्थिति अस्थायी

जेपी नड्डा जनवरी 2020 में भाजपा अध्यक्ष बने थे। जनवरी 2023 में उनका तीन साल का कार्यकाल पूरा हुआ। उसके बाद से वे बिना औपचारिक विस्तार के ‘कार्यवाहक’ रूप में काम कर रहे हैं। यह भाजपा के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि कोई अध्यक्ष बिना विधिवत दूसरे कार्यकाल के, छह वर्षों तक पद पर बना रहा है।

चुनाव में देरी की वजहें: संगठनात्मक चुनाव अधूरे

सूत्रों के मुताबिक भाजपा के कई बड़े राज्यों में अभी तक संगठनात्मक चुनाव ही नहीं हुए हैं। उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में यह प्रक्रिया अटकी हुई है। गुजरात में सी. आर. पाटिल लगातार पांच साल से प्रदेश अध्यक्ष हैं और अब केंद्रीय मंत्री भी हैं, जिससे दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है।

संघ-भाजपा विमर्श: नया चेहरा या पुराना भरोसा?

सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के शीर्ष नेताओं के बीच अध्यक्ष पद को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। पूर्व अध्यक्षों, वरिष्ठ मंत्रियों और संवैधानिक पदों पर रहे नेताओं से राय ली गई है। हालांकि यह सब ‘सहमति निर्माण’ की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, कोई निर्णायक फैसला अभी नहीं हुआ है।

बिहार चुनाव: जेपी नड्डा की भूमिका सीमित?

जेपी नड्डा का बिहार से पारिवारिक जुड़ाव है — उनके पिता वहां प्रोफेसर थे और उनकी शिक्षा भी वहीं हुई। बावजूद इसके, नड्डा की बिहार चुनावों में कोई खास सक्रियता देखने को नहीं मिल रही। चुनावी रणनीति की कमान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संभाल रखी है, जिनकी बिहार यात्राएं लगातार हो रही हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति भी अब सीमित हो गई है। हैरानी की बात यह है कि अब तक भाजपा ने बिहार चुनाव के लिए प्रभारी तक नियुक्त नहीं किया है।

आगे का रास्ता: अध्यक्ष चुनाव पहले या बाद में?

पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि पहले प्रदेशों में संगठनात्मक चुनाव कराए जाएंगे और फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाएगा। वहीं दूसरी ओर कुछ जानकारों का मानना है कि उप राष्ट्रपति चुनाव के तुरंत बाद भाजपा नेतृत्व परिवर्तन कर सकती है, ताकि बिहार जैसे अहम राज्य में नया नेतृत्व अपना प्रभाव दिखा सके।

भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जहां एक ओर जेपी नड्डा बिना आधिकारिक विस्तार के अध्यक्ष बने हुए हैं, वहीं संगठनात्मक स्तर पर चुनाव प्रक्रिया और बिहार जैसे राज्यों में चुनावी तैयारियां, इस पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना रही हैं।

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