भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से चला आ रहा असमंजस अब भी बरकरार है। संगठनात्मक चुनाव की चर्चा अब ठंडी पड़ चुकी है। पहले संसद का मानसून सत्र, फिर “हर घर तिरंगा” अभियान और अब उप-राष्ट्रपति चुनाव की व्यस्तताओं ने इस प्रक्रिया को और पीछे धकेल दिया है। वहीं, बिहार में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद चुनावी अभियान की कमान संभाल ली है — ऐसे में संभावना है कि भाजपा अध्यक्ष का चुनाव अब नवंबर के बाद ही संभव हो पाए।
छह साल की अवधि पूरी करने की ओर जेपी नड्डा
जेपी नड्डा जनवरी 2020 में भाजपा के अध्यक्ष बने थे। अगले वर्ष जनवरी में उनका कार्यकाल छह साल पूरा कर लेगा। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उन्हें अब तक दूसरे आधिकारिक कार्यकाल के लिए चुना नहीं गया है, जबकि लगभग ढाई साल से वे ‘तदर्थ व्यवस्था’ में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यही नहीं, पिछले एक साल से वे केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्यरत हैं।
नया अध्यक्ष बिहार चुनाव से पहले?

सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा नेतृत्व के बीच यह सहमति बन रही है कि बिहार चुनाव नए अध्यक्ष के नेतृत्व में लड़ा जाना चाहिए। इसी के तहत पार्टी के करीब 100 वरिष्ठ नेताओं — पूर्व अध्यक्षों, मंत्रियों और संवैधानिक पदों पर रहे लोगों — से विचार-विमर्श हो चुका है। हालांकि, पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि यह सिर्फ दिखावे की कवायद है और कोई ठोस निर्णय अभी नहीं हुआ है।
संगठनात्मक ढांचे में भी असंतुलन
वर्तमान में भाजपा के सात राज्यों में संगठन चुनाव लंबित हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अभी तक प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ है। गुजरात में सी.आर. पाटिल पिछले पांच सालों से प्रदेश अध्यक्ष हैं और पिछले एक साल से वे केंद्रीय मंत्री भी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पहले राज्यों में संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप दिया जाएगा, फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति होगी।
नड्डा और बिहार: समीकरण क्या कहते हैं?
जेपी नड्डा का बिहार से गहरा नाता रहा है — वहीं जन्म, शिक्षा और पारिवारिक जड़ें। इस कारण उन्हें बिहार चुनाव तक अध्यक्ष पद पर बनाए रखने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस बार नड्डा बिहार चुनावी गतिविधियों में कम सक्रिय नजर आ रहे हैं। न ही उनके दौरों की संख्या बढ़ी है, न ही रणनीतिक बैठकों में उनकी भूमिका प्रमुख रही है।
मोदी की सीधी कमान और शाह की दूरी
बिहार चुनाव को लेकर अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रियता सबसे अधिक दिखी है। हर महीने उनकी बिहार यात्रा हो रही है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि वे खुद इस चुनाव को लीड करेंगे। दूसरी ओर, गृह मंत्री अमित शाह की बिहार में उपस्थिति सीमित रही है, और वे चुनावी रणनीति के प्रमुख चेहरे के रूप में अब तक सामने नहीं आए हैं। साथ ही, भाजपा ने अभी तक चुनाव प्रभारी की भी नियुक्ति नहीं की है, जबकि चुनाव में तीन महीने से भी कम का समय रह गया है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, संगठनात्मक प्रक्रिया और चुनावी व्यस्तताओं के चलते संकेत यही मिलते हैं कि पार्टी नए अध्यक्ष की घोषणा बिहार चुनाव के बाद ही करेगी। तब तक जेपी नड्डा ‘कार्यकारी अध्यक्ष’ के रूप में ही भूमिका निभाते रहेंगे — एक असाधारण राजनीतिक स्थिति, जो भाजपा के इतिहास में पहली बार देखी जा रही है।
