हिसार जिले की हांसी तहसील में दो दिन की बारिश ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। कॉलोनियों से लेकर मुख्य चौक-चौराहों और बस अड्डे तक पानी-पानी हो गया है। सीएम नायब सिंह सैनी और जिला प्रशासन के दावे सिर्फ कागजों में नजर आते हैं, जबकि ज़मीनी हालात में लोगों की जिंदगी नारकीय हो चुकी है।
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शहर का हाल बेहाल, प्रशासन नदारद
हांसी के अंबेडकर चौक, उमरा गेट, जींद चौक, पीडीएसडी स्कूल क्षेत्र जैसे मुख्य इलाके जलमग्न हो चुके हैं। मॉडल टाउन, रुपनगर, कृष्णा कॉलोनी, सैनियाना मोहल्ला और जगदीश कॉलोनी जैसे रिहायशी इलाकों में सीवर लाइनें पूरी तरह जाम हैं। लोगों को घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है।
स्थानीय निवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा, “यहां थोड़ी सी बारिश होती है और पूरा हांसी डूबने लगता है। सरकार और प्रशासन सिर्फ दिखावे की बातें करते हैं, लेकिन नालियों और सीवर की सफाई तक नहीं करवाई जाती।”
स्कूल नहीं पहुंच पाए बच्चे, बस अड्डा जलमग्न
लगातार जलभराव के कारण बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। हांसी बस स्टैंड पर घुटनों तक पानी भरा है, जहां यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महिलाएं, बुज़ुर्ग और स्कूली बच्चे बस अड्डे में घंटों तक पानी में फंसे रहे, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया।
घग्घर ड्रेन टूटी, फसलें बर्बाद – किसान बेसहारा

केवल शहरी क्षेत्र ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी हालात बदतर हैं। शाहपुर के पास घग्घर मल्टीपर्पज ड्रेन और कबीर माइनर बारिश के दबाव में टूट गए, जिससे दर्जनों एकड़ खेतों में पानी भर गया।
सरपंच प्रतिनिधि डॉ. राजकुमार ने बताया, “ड्रेन टूटने से कपास, मूंग और बाजरे की फसलें बर्बाद हो गई हैं। दो-दो फुट तक खेतों में पानी भर गया, किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।”
जेई नितिन के अनुसार करीब 40 क्यूसेक पानी खेतों में घुसा है। ग्रामीणों ने खुद श्रमदान कर ड्रेन की मरम्मत की, लेकिन प्रशासन सिर्फ तमाशबीन बना रहा।
17% अधिक बारिश, फिर भी सरकार तैयार नहीं
मौसम विभाग के अनुसार इस बार हरियाणा में सामान्य से 17 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, बावजूद इसके राज्य सरकार और जिला प्रशासन इससे निपटने के लिए कोई ठोस तैयारी नहीं कर सका। सवाल यह है कि क्या हर बार बारिश के बाद लोग इसी तरह पानी में डूबते रहेंगे और सरकार मूकदर्शक बनी रहेगी?
मुख्यमंत्री सैनी पर सवाल
कई नागरिकों ने सीएम नायब सिंह सैनी और जिला प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई है। न कोई राहत टीम, न पंपिंग सेट, न ही मेडिकल कैंप। केवल ट्विटर पर संवेदनाएं और जमीनी हकीकत में शून्य। क्या यही
है डबल इंजन सरकार की तैयारी?
