Headlines

H-1B वीज़ा शुल्क पर क्या राहत मिली?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से एच-1बी वीज़ा की वार्षिक फीस 1 लाख डॉलर तय किए जाने की घोषणा से भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों में हड़कंप मच गया था। कई टेक कंपनियों ने तो अपने कर्मचारियों को एहतियातन अमेरिका वापसी तक रुकने की सलाह तक दे दी थी।
लेकिन अब एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि “वर्तमान में अमेरिका में एच-1बी वीज़ा पर काम कर रहे भारतीय नागरिकों को घबराने की ज़रूरत नहीं है। न ही उन्हें तुरंत अमेरिका लौटने की आवश्यकता है और न ही नए शुल्क का भुगतान करना होगा।”


नए आवेदन पर लागू होगा नियम
अधिकारी के मुताबिक, यह नई फीस केवल नए वीज़ा आवेदनों पर लागू होगी। जो लोग पहले से एच-1बी वीज़ा पर हैं या जिनका वीज़ा नवीनीकरण (रिन्यूअल) होना है, वे इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे।

भारतीयों पर सबसे अधिक असर की आशंका
एच-1बी वीज़ा धारकों में लगभग 71 से 72 प्रतिशत भारतीय हैं। यही कारण था कि घोषणा के बाद भारतीय उद्योग जगत और आईटी कंपनियों में चिंता का माहौल बन गया था।

भारत सरकार भी सतर्क
भारत सरकार ने अपने सभी दूतावासों और मिशनों को निर्देश दिए हैं कि वे अगले 24 घंटों में अमेरिका लौटने वाले भारतीय नागरिकों को हर संभव मदद उपलब्ध कराएं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस फैसले के मानवीय और आर्थिक प्रभावों का गहन अध्ययन किया जा रहा है।
बयान में यह भी कहा गया कि “भारत और अमेरिका दोनों ही नवाचार और उद्योग जगत की साझेदारी में रुचि रखते हैं। आगे की दिशा तय करने के लिए परामर्श प्रक्रिया जारी रहेगी।


व्हाइट हाउस ने दी समय-सीमा
व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार नया नियम 21 सितंबर से लागू होगा। एच-1बी वीज़ा की अवधि आमतौर पर तीन साल की होती है, जिसे अधिकतम छह साल तक बढ़ाया जा सकता है। यह वीज़ा मुख्य रूप से वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कंप्यूटर प्रोग्रामरों जैसे पेशेवरों को अमेरिकी कंपनियों में काम करने की अनुमति देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *