
हरियाणा की सरकार इस वक्त एक भयानक प्रशासनिक और नैतिक संकट के भंवर में है। एक ही हफ्ते में दो पुलिस अधिकारियों वरिष्ठ आईपीएस वाई पूरन कुमार और एएसआई संदीप लाठर ने आत्महत्या कर ली, और इन मौतों की जड़ों में जातिगत उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, राजनीतिक संरक्षण और सरकारी संवेदनहीनता के खुले काले धब्बे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी “बुलडोजर”, “ड्रग फ्री हरियाणा”, और “विकास की उड़ान” जैसे बड़े-बड़े दावे करते घूम रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि खुद उनके ही मातहत अफसर गहरी निराशा, अवसाद और उत्पीड़न के आग में जल रहे हैं।

पूरन कुमार के सुसाइड नोट में साफ लिखा गया कि वरिष्ठ अधिकारियों, डीजीपी और एसपी ने उसकी जाति के कारण जानबूझकर मानसिक प्रताड़ना दी। जब मुख्यमंत्री से उम्मीद की, तो नतीजा सिफर रहा आरपीआई नेता के मुताबिक सैनी ने खुले मंच पर कह दिया: “मैं तो चपरासी भी सस्पेंड नहीं कर सकता!” यह बयान सरकार की अक्षमता और मानसिक दिवालिएपन को सार्वजनिक कर गया। सत्ता दिल्ली दरबार चलाता है, सीएम तो बस कठपुतली बनकर बचे हैं।इसी मामले की जांच कर रहे एएसआई संदीप ने भ्रष्टाचार के गहरे आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली। अब सरकार जाति, भ्रष्टाचार और राजनीति के इस खेल में सच्चाई छुपाने की कोशिश में लगी है। NCRB के आंकड़े हरियाणा को देश के सबसे असुरक्षित राज्यों में गिनाते हैं, कानून-व्यवस्था रामभरोसे है, और पुलिस प्रतिष्ठान का भरोसा एक-दूसरे पर बिल्कुल नहीं। दलित-जाट टकराव, सत्ता संरक्षण और आम आदमी का अभाव हरियाणा प्रशासन की सच्ची तस्वीर यही है..
आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और किसान नेताओं ने सरकार के एक साल पूरे होते ही नायब सिंह सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री खट्टर पर तीखा हमला बोला “यह सरकार जनता के लिए नहीं, बस हाईकमान और अपने एजेंडे के लिए है।” आज सरकार का ध्यान सिर्फ दिखावे के विज्ञापन और सियासी प्रचार पर है। जनता की जरूरतें, सुरक्षा, रोजगार, जनकल्याण, और न्याय इन सब पर हरियाणा सरकार की चुप्पी आज सबसे बड़ी खतरे की घंटी है.. हरियाणा के लोग पूछ रहे हैं: क्या न्याय, सुरक्षा और सम्मान यहां सिर्फ भाषणों, पोस्टरों और रिपोर्टों में ही मिलेगा? या सैनी सरकार के पास हकीकत में जवाबदारी और संवेदना का भी कोई कर्ज बाकी है? जनता अब सिर्फ जवाब नहीं, हिसाब मांग रही है!
